रीवा के नये परिसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, न्याय पाना हर नागरिक का कानूनी अधिकार है; समय पर न्याय दिलाना लक्ष्य है। नवनिर्मित भवन को न्याय का मंदिर बताया। रियासत काल से रीवा न्याय में अग्रणी—यह उनका ऐतिहासिक वाक्य है, इस डेस्क की स्वतंत्र इतिहास जाँच नहीं।

उन्होंने कहा, पिछले डेढ़-दो साल में 30 से अधिक छोटे-बड़े न्यायालय भवन लोकार्पित हुए, सिलसिला जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश सूर्यकांत ने उसी मंच पर सरकार के सहयोग से 30 नवीन भवन की सौगात दोहराई। समता दोनों वाक्य रखता है, हर भवन की चाबी यहाँ नहीं खोलता।

पीठ की कमी उसी मंच पर

मुख्य न्यायाधिपति कैत ने कहा, रीवा भवन में 40 कोर्ट और 750 वकीलों की व्यवस्था; उच्च न्यायालय में प्रकरण अधिक, जजों की संख्या कम; निराकरण के लिए 32 नये जज आवश्यक। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सौगात को गौरव कहा। तस्वीर लोकार्पण की है।

मुख्य बातें

  • लोकार्पण: नवनिर्मित परिसर; मुख्यमंत्री ने न्याय का मंदिर कहा।
  • 30 से अधिक छोटे-बड़े न्यायालय भवन डेढ़-दो साल में—मंच का योग।
  • सीजे कैत: 40 कोर्ट, 750 वकील; हाईकोर्ट में 32 जज आवश्यक।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · नये कानूनों से न्यायालयीन प्रणाली और लोकतंत्र हुआ है समृद्ध ↗4 मई 2025

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।

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